Posts

Showing posts from September, 2011

कांहा वो दिन थे और काहा ये दिन

कांहा वो दिन थे और काहा ये दिन है वो था हँसता खेलता बचपन  और आज है तपती रेत मे चलने के दिन तब आंसू  बहते थे जिद्द के लिए  और आज आंसू बहते है मज़बूरी के लिए  तब हँसते थे बिना कारण  और आज हसने के लिए कोई वजह मिलती नही  तब साथ था जग सारा  और आज अपने भी पराये हो गये